शनिवार, 11 मई 2013

"माँ"



माँ जो होती है सदा
अपने बच्चों के लिए भगवान
या उससे भी बड़ी
कोई और नही कर सकता
उनकी बराबरी
यहाँ तक कि ईश्वर भी.
अनादि कल से प्राप्त है माँ को
प्रथम गुरु होने का श्रेय
ऐसा गुरु जिसे कबीर ने बताया है
ईश्वर से भी महान.
जो हमेशा हमारी ही करती हैं चिंता
खुद सोती है गीले में
हमें सुलाकर सूखे में
जो रह लेती है भूखी
सभी को खिलाने के बाद
या खाती है जूठा
या बचा-कुचा
बिना किसी स्वार्थ के
ऐसा त्याग और प्यार सिर्फ दे सकती है
एक माँ और कोई नही
हर पल हर क्षण
सोचती है आपके
सिर्फ हमारे लिए
करती है हमेशा हमारी चिंता
छोटी छोटी बातों का रखती है ध्यान
खुद को छोड़
सिर्फ चाहती है भलाई
सिर्फ हमारी
पर कभी-कभी हम
हो जाते हैं ज्यादा बड़े
और माँ कि चिंता
लगती है हमें बंधन जैसी
जिसे हम चाहते है तोड़ देना
हा सच ही तो है
बंधन ही है
उनकी चिंता
उनकी बातें
उनकी डाट
उनकी फटकार
उस प्यार का बंधन,
जो नही दे सकता कोई और
माँ के सिवा
माँ तुम्हे प्रणाम है हमारा
वंदन है तुम्हारा
अभिनन्दन है तुम्हारा
हर रोज हर घड़ी
हर क्षण हर पल
क्योकि माँ कि महानता को
नही बांध सकते हम
किसी एक खास दिन में.................

अनुराग सिंह "ऋषी"
12/05/2013

2 टिप्‍पणियां:

  1. सच सबसे प्यारी होती है माँ....बहुत प्यारी कविता

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    1. क्या कह सकते हैं माँ तो माँ होती है
      धन्यवाद आपको

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